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दीपों का त्योहार करीब आते ही कुंभकारों के चाक घूमने लगे,दीये बनाने में जुटे

कासगंज

रिपोर्ट उबैद अली

दीपावली को लेकर मिट्टी के दीये बनाने में जुटे कुंभकार

कासगंज- दीपों का त्योहार दिवाली करीब आते ही कुंभकारों के चाक घूमने लगे हैं। वह दिन-रात मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हुए हैं। पिछले वर्ष कोरोना महामारी काल के कारण बेरोजगार बैठे मिट्टी के बर्तनों का कारोबार करने वाले कुंभकार दीपावली के त्योहार को लेकर खुश नजर आ रहे है। इस बार कुंभकार परिवारों को अच्छी बिक्री की उम्मीद है।


बीते कुछ सालों में चीन निर्मित दीये और कैंडल ने कुंभकारों के काम पर ब्रेक लगा दिया था, लेकिन चीनी सामान के प्रति शुरू हुए विरोध से एक बार फिर मिट्टी के दीयों को दिवाली पर बढ़ावा मिला। इतना ही नहीं, इससे कुंभकार परिवारों का रोजगार भी चल निकला। कासगंज जनपद के अमापुर कस्बे में सुभाष नगर प्रजापति कॉलोनी के हर घर में इन दिनों चाक तेजी के साथ घूम रहा है। वह मिट्टी के दीये, गोलक, छोटे कलश, मटकी, प्याला, तैयार कर रहे हैं। इस बार उन्हें अच्छी बिक्री की उम्मीद है। एक कुंभकार द्वारा प्रतिदिन औसतन एक हजार दीये बनाए जा रहे हैं। बाजार में 50 रुपये प्रति सौ दीये की कीमत पर इनकी बिक्री की उम्मीद है।

कुंभकार राम शहजादे ने बताया कि दिवाली के त्योहार पर मिट्टी के दीये जलाने की परंपरा सैकड़ो साल पुरानी है।

कुंभकार रूप किशोर ने बताया कि दीपावली आते ही परिवार के लोगों के सहयोग से दीप, दीपक, गुल्लक, घड़ा, मटकी, एवं मिट्टी के खिलोने बनाए जाते है।

लाखन प्रजापति ने बताया कि ताल तलैया समाप्त होने से मिट्टी नही मिलती है। जिससे पुश्तैनी कार्य को जिंदा रखना मुश्किल हो रहा है। दीपक और बर्तन बनाने के लिए जिस मिट्टी की आवश्यकता पड़ती है। वह हर जगह नही मिलती है।

उबैद अली की रिपोर्ट

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