मध्यप्रदेश के श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क अब अफ्रीकन चीतों की अगवानी के लिए तैयार है
-देश में 70 साल बाद एक बार फिर चीतों की दहाड़ गूंजेगी।
-1952 में भारत से चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था
-कूनो नेशनल पार्क में दौड़ते नजर आएंगे चीते

डॉ0 एस0 बी0 एस0 चौहान की खास रिपोर्ट
चकरनगर/इटावा। भारत में 74 साल पहले यानी 1948 में आखिरी बार भारत में चीते दिखे थे औऱ 1952 में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था,लेकिन विलुप्त हो चुके चीते एक बार फिर से देश की धरती पर दौड़ते नजर आएंगे।जल्द ही मध्यप्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीका से चीतों को लाकर बसाया जा रहा है, जिसकी तैयारियां अंतिम चरणों में है।

बता दें कि, मध्यप्रदेश के श्योपुर में दो दशक पहले गिर के एशियाई शेरों को बसाने के लिए विकसित किए गए कूनो नेशनल पार्क में अब जल्द ही अफ्रीकन चीते आने वाले हैं।कुछ ही दिनों में यहां अफ्रीका से लाकर चीते छोड़े जाएंगे. चीता लाए जाने के लिए भारत और नामीबिया सरकार के बीच करार होने के बाद श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में सरगर्मी बढ़ने के साथ-साथ चकरनगर चंबल बेल्ट में भी सरगर्मी गई है।

पिछले दो सालों से तैयारियां जारी

इस नेशनल पार्क में चीतों को बसाने की तैयारियां यू तो पिछले दो साल से चल रही हैं लेकिन, अब कूनो प्रबंधन ने चीतों को नए घर में रखने के लिए फायनल टच दे दिया है। चीतों को यहां लाए जाने के बाद उन्हें सॉफ्ट रिलीज किया जाएगा।

यानी करीब एक महीने तक चीतों को विशेष तौर पर बनाए गए एनक्लोजर के अंदर एकांतवास में रखा जाएगा। इससे चीते आसानी से यहां के वातावरण के अनुसार ढल सकेंगे। श्योपुर का कूनो पालपुर अभयारण्य लंबे समय से नये मेहमानों का इंतजार कर रहा था लेकिन, योजना अब तक परवान नहीं चढ़ सकी अब अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाने के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।

5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का बाड़ा

चीतों के लिए 5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का बाड़ा बनाया गया है. इसके चारों ओर करीब नौ फीट ऊंची जालीदार फेंस बनाई गई है और ऊपरी हिस्से में बिजली के तार गए हैं. बाड़े में सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी. आपको बता दें कि कूनो पालपुर नेशनल पार्क 750 वर्ग किमी में फैला है जो कि 6,800 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले खुले वन क्षेत्र का हिस्सा है.

मध्यप्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक, जसबीर सिंह चौहान ने बताया कि यह एक ऐतिहासिक पल है जब चीतों को दोबारा भारत लाया जा रहा है. पहले एशियन चीतों को ही कूनो में बसाने की योजना थी लेकिन ईरान में उनकी सीमित संख्या को देखते हुए अफ्रीका के चीतों को अब कूनो लाया जा रहा है। उन्होंने इनको शुद्ध वातावरण और भारतीय जलवायु के अनुसार ढा़लने के बाद चंबल बेल्ट में उन्हें प्राकृतिक आवास देते हुए अभयारण्य हेतु प्रतिबंधित स्थान पर छोड़ दिया जाएगा इस परिपेक्ष में इटावा जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी जी जान से चंबल वैली के अंदर संबंधित गांव के ग्राम वासियों को चीतों से संबंधित जानकारी और तरह-तरह का सुझाव साझा कर रहे हैं। इस परिपेक्ष में आज जवाहर इंटर कॉलेज चकरनगर में 314 छात्रों के बीच जिला प्रशासन से आए हरि किशोर शुक्ला रेंजर, बृजेश तिवारी,विष्णु पाल वन दरोगा, चंद्रभान, वन दरोगा, सिद्धार्थ वन जीव रक्षक, महेंद्र सिंह वन्यजीव रक्षक, धर्मेंद्र वन्यजीव रक्षक, रोहित कुमार व अन्य स्टाफ मौजूद रहा लोगों में जहां एक तरफ खुशी है की चीते आएंगे और हमारे चंबल बेल्ट में खुशहाली की लहर होगी पर्यटक क्षेत्र क्षेत्र में आकर दीदार करेंगे लोगों का रोजगार भी बढ़ेगा शासन की तरफ से सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी, पर वही कुछ ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि जब यह चीते पहुंच और कंट्रोल से बाहर होंगे और इनकी संख्या जब ज्यादा बढ़ेगी तो आज के कई दशकों पूर्व जन, पशु हानि हुआ करती थी उसी तरीके से होना भी संभव होगी इसी मसले को लेकर अधिकारी आपस में विचार साझा कर रहे हैं। चंबल बेल्ट में जगह-जगह पर यह प्रचार प्रसार एक चैन के रूप में किया जा रहा है।

 

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