फर्रुखाबाद ,आरोही टुडे संवाददाता
जीवन में परिवार नियोजन के साधनों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 26 सितंबर को विश्व गर्भ निरोधक दिवस मनाया गया। जनपद की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर परिवार नियोजन स्टॉल लगाकर विश्व गर्भ निरोधक दिवस के बारे में बताया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ अवनीन्द्र कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन के साधन आज के समय की ज़रूरत बन गए हैं , जिनको बच्चे नहीं चाहिए या कुछ समय बाद चाहिए लेकिन परिवार नियोजन के साधनों से अनभिज्ञ हैं उनको जागरूक करने के लिए ही जमीनी कार्यकर्ता से लेकर स्वास्थ्य इकाइयों पर तैनात परिवार नियोजन परामर्श दाता द्वारा लोगों को परिवार नियोजन के साधनों के प्रति जागरूक किया जाता है l
सीएमओ ने बताया कि आज़ तो कई प्रकार के साधन सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर मौजूद हैं जिनको अपने मनमुताबिक अपनाकर अपने हिसाब से परिवार नियोजित कर सकते हैं l
परिवार कल्याण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ रंजन गौतम ने बताया कि बढ़ रही जनसंख्या बहुत बड़ी समस्या है। इसको केवल जागरूकता और शिक्षा से हल किया जा सकता है। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को रोकने के लिए दो बच्चों के बीच 3 साल का अंतराल रखना, गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना एवं रूढ़िवादी सोच को बदलना जरूरी है।
डॉ रंजन ने बताया कि स्वास्थ्य इकाईओं में आने वाले महिला व पुरूषों को नसबंदी, पीपीआईयूसीडी, आईयूसीडी, छाया, अंतरा, कंडोम आदि संसाधनों की जानकारी दी गई।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमसाबाद के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ अभिजीत यादव ने बताया कि परिवार नियोजन के आठ प्रमुख साधन हैं, जो पूरी तरह सुरक्षित भी हैं। इन साधनों में से दंपती कोई भी मनपसंद साधन अपना सकते हैं। नव दंपती जब तक बच्चा न चाहें तब तक अस्थायी साधनों का इस्तेमाल कर सकते हैं। पहला बच्चा होने के बाद तीन साल तक अस्थायी साधनों का विकल्प चुना जा सकता है। गर्भसमापन या गर्भपात के बाद भी छह माह तक परिवार नियोजन का साधन अपनाया जा सकता है।
पुरुष नसबंदी के सर्जन डॉ आरिफ़ सिद्दीकी ने बताया कि सभी साधन सुरक्षित हैं। परिवार नियोजन के स्थायी साधन यानी नसबंदी को पुरुष और महिलाएं दोनों अपना सकते हैं। उन पुरुषों को नसबंदी करवानी चाहिए जो शादी-शुदा हो और जिनकी उम्र 60 वर्ष से कम हो। उनके पास कम से कम एक बच्चा होना चाहिए जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। पुरुष नसबंदी तभी करवानी चाहिए जब पत्नी ने नसबंदी न करवाई हो। पुरुष नसबंदी कभी भी करवाई जा सकती है।
डॉ राममनोहर लोहिया चिकित्सालय महिला में स्त्री विशेषज्ञ के पद पर तैनात डॉ. नमिता दास का कहना है कि महिला नसबंदी प्रसव के सात दिन के भीतर, माहवारी शुरू होने के सात दिन के भीतर और गर्भपात होने के तुरंत बाद या सात दिन के अंदर करवाई जा सकती है। वह महिलाएं इस साधन को अपना सकती हैं जिनकी उम्र 15 वर्ष से अधिक और 49 वर्ष से कम हो। दंपती के पास कम से कम एक बच्चा हो जिसकी उम्र एक वर्ष से अधिक हो। पति ने पहले नसबंदी न करवाई हो और सुनिश्चित कर लें कि महिला गर्भवती न हो और प्रजनन तंत्र में संक्रमण न हो। महिला की सहमति भी नितांत जरूरी है।
ज़िला परिवार नियोजन परामर्श दाता विनोद कुमार ने बताया कि गर्भ निरोधक साधनों को अपनाने पर लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मिशन परिवार विकास की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है l पुरुष नसबंदी पर 3000 तथा महिला नसबंदी पर 2000 रुपये लाभार्थी को दिए जाते हैं । प्रसव के 48 घंटे के भीतर नसबंदी कराने में महिला को 3000 रुपये तथा प्रसव के बाद पीपीआईयूसडी में महिला को 300 रुपये मिलते हैं। अंतरा इंजेक्शन लगवाने पर लाभार्थी को 100 रुपये दिए जाते हैं।
विनोद ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 1अप्रैल 21से31 मार्च 22 तक 3पुरूष नसबंदी,478 महिला नसबंदी,4387 त्रैमासिक गर्म निरोधक इंजेक्सन अंतरा, 10492, पीपीआईयूसीडी,9149 आईयूसीडी,27 गर्म समापन के बाद आईयूसीडी, और 23842 साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली छाया का प्रयोग किया गया l
वहीं इस वित्तीय वर्ष में अगस्त 2022 तक 3पुरूष नसबंदी,340 महिला नसबंदी,5162 त्रैमासिक गर्म निरोधक इंजेक्सन अंतरा, 3598, पीपीआईयूसीडी,2912 आईयूसीडी,14 गर्म समापन के बाद आईयूसीडी, और 11849 साप्ताहिक गर्भनिरोधक गोली छाया का प्रयोग किया जा चुका है l
इस दौरान बीपीएम आशुतोष, टीएसयू से परिवार नियोजन विशेषज्ञ रिजवान अली सहित अन्य लोग मौजूद रहे ।

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