कायमगंज ,फर्रुखाबाद,आरोही टुडे संवाददाता

प्रदेश की पुलिस तथा उसका खुफिया तंत्र पूरे 28 साल तक जिस हत्या आरोपी, सजा-ए-मौत का आदेश न्यायालय द्वारा होने पर भी फरार रहा। उसका पता नहीं लगा सके । लेकिन अपराध- अपराध है, उसकी सजा तो एक न एक दिन मिलती ही है। शायद यही कहावत इस मामले में भी चरितार्थ होती दिखाई दे रही है । जिसमें लखनपुर गांव में वर्ष 1991 में सामूहिक हत्याकांड को अंजाम देते हुए 6 को मौत के घाट उतार दिया गया था। मामला इसी गांव के एक व्यक्ति की बेटी को प्रेम प्रसंग में फंसा कर भगा ले जाने से उस समय की विवेचना के अनुसार प्रकाश में आया था। इसी रंजिश के चलते वर्ष 1991 में सामूहिक हत्या कांड में लखनपुर के निवासी बाबूराम उसके पड़ोसी गुलजारीलाल, गुलजारी लाल की पत्नी रामवती तथा बेटे धर्मेंद्र, राकेश ,उमेश को मौत के घाट उतार दिया था। इस हत्याकांड में यही के श्री कृष्ण ,रामसेवक तथा किशोरी लाल को
आरोपी बनाते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया था ।इन तीनों अभियुक्तों ने उसी वर्ष 19 अगस्त 1991 में न्यायालय पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया था । कानूनी प्रक्रिया के दांवपेच के बीच इन तीनों को जमानत मिल गई और यह कारागार से बाहर आ गए थे। सामूहिक हत्याकांड में ईसी एक्ट कोर्ट ने दोनों पक्षों के विद्वान अधिवक्ताओं की तर्क सुनने के बाद तीनों आरोपियों को सजा-ए-मौत की सजा सुना दी थी। न्यायालय द्वारा मृत्युदंड आदेश पारित होने के बाद तीन आरोपियों में से किशोरी लाल और रामसेवक भूमिगत हो गए थे । वही आरोपी श्री कृष्ण जेल की सलाखों के पीछे चला गया था ।भूमिगत हुए आरोपियों में से रामसेवक को बौद्ध भिक्षु के भेष में घूमते हुए फर्रुखाबाद में ट्रैफिक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तार होने के बाद कड़ाई से की गई पूछताछ में उसने अपने इतने दिन फरारी जीवन बिताने के बारे में बताया कि वह दिल्ली चला गया था ।जहां संगम विहार में बौद्ध दीक्षा लेकर अपना नाम परिवर्तित कराया और वही से बौद्ध भिक्षु के भेष में आकर जनपद बदायूं के कस्बा म्याऊं में बने बौद्ध मठ में रहता रहा । उसके अनुसार उसने यहीं से अपना आधार कार्ड तथा नागरिकता संबंधी अन्य कागजात भी बनवा लिए । लेकिन आज 28 साल अंतराल के बाद आखिर अपराध सामने आ ही गया ,और रामसेवक पुलिस की गिरफ्त में पहुंच गए। उसके दूसरे फरार भाई किशोरी लाल के बारे में भी पकड़े गए रामसेवक से पूछताछ कर पुलिस पता लगाने का प्रयास कर रही है।

संवाददाता अभिषेक गुप्ता की रिपोर्ट

Leave a Reply

Your email address will not be published.