-राजा विजय प्रताप सिंह जूदेव ने राजगढ़ी को उपेक्षित देख अपनी मेहनत की गाढी कमाई का पैसा राज महल में याद तरोताजा के लिए आशापुरा वाली मां के स्थान बनाने का लिया था संकल्प
– दिमनी मध्य प्रदेश व जनपद इटावा में क्षत्रियों की शान विधायक नरेंद्र सिंह तोमर ने अपने उद्बोधन में कहा कि क्षत्रियों कि बिना इतिहास शून्य है।देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए आजादी के दीवाने अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले राजा निरंजन सिंह जूदेव को सरकार पुष्प भी नहीं कर सकती अर्पित ।

(डॉ0एस0बी0एस0 चौहान)
चकरनगर,इटावा। आजादी के इतिहास में अग्रणी भूमिका निभाने वाले चंबल घाटी के राजा निरंजन सिंह जूदेव ने जंगे आजादी में देश के लिए राजपाट तक कुर्बान कर दिया लेकिन सरकारों ने खंडहर में तब्दील हो चुके राज महल और राज परिवार की ओर ध्यान नहीं दिया यहां पर मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के एहसान को नहीं नहीं भुलाया जा सकता उन्होंने अपने शासनकाल में राजघराने की जानकारी हासिल करने के लिए संबंधित विभाग को जिम्मेदारी सौंपी थी और उनका यह मानना था कि राजघराने और खंडहर में तब्दील हो रहे राज महल को सरकार संज्ञान लेते हुए कुछ मदद करें पर उसकी जांच में आगे क्या हुआ इसका अभी तक पता नहीं क्योंकि धरातल पर कुछ भी आज तक नहीं दिखा। तहसील मुख्यालय चकरनगर से पश्चिम दिशा में लगभग 500 मीटर की दूरी पर बीहड़ की स्थित राजा निरंजन सिंह जूदेव के परिजन खंडहर महल के सामने रहते हैं। आजादी का गवाह महल का जीर्णशीर्ण मुख्य द्वार उपेक्षा की कहानी कहता नजर आता है। पर यहां यह भी चिर स्मरणीय रहेगा की राजा निरंजन सिंह जूदेव की वंश परंपरा कड़ी में वर्तमान राजा विजय प्रताप सिंह जूदेव ने विचार किया कि न तो सरकार और नहीं संबंधित अधिकारी इस इतिहास को मिटने से बचाने के लिए किसी तरह का उपाय नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने एक रात में यह सोचकर स्वप्न देखा कि क्यों ना राजगढ़ी ही को इतिहास के पन्नों से दूर ना होने दिया जाए और उसकी चिरस्मरणीय याद लोगों के बीच छाप छोड़ती रहे। इसी के मद्देनजर आज के परिवेश में हिम्मती और बहादुर राजा विजय प्रताप सिंह जूदेव ने कुल देवी मां आशापुरा वाली का मंदिर स्थापित करने का सफल प्रयास किया, जो 28 सितंबर सदैव याद रहेगा इसी दिन मां आशापुरा वाली मंदिर के निर्माण हेतु भूमि पूजन का कार्यक्रम बड़ी ही शालीनता, सद्भाव और लगन के साथ दूर-दूर से आए राजाओं,अतिथियों और तमाम उपस्थित समुदाय के बीच भूमि पूजन का कार्यक्रम सादगी और हर्षोल्लास के साथ पूरा हुआ। अब यहां पर भव्य आशापुरा वाली मां जो चौहान और भदोरिया कुल वंश की आराध्य पूज्य देवी है वहीं पर इनका साथ देने वाले स्वर्गीय नारायण सिंह चौहान(नरायनअब्बा)के पुत्रों द्वारा भूमि दान की गई। वहीं पर आशापुरा आशापुरा वाली माता मंदिर के लिए स्वर्गीय रूप सिंह चौहान राज्य परिवार व स्वर्गीय प्रबल प्रताप सिंह चौहान राज परिवार व रामपाल सिंह चौहान राज परिवार द्वारा माता मंदिर पार्किंग के लिए अपने भूमि दान की। यहां पर यह बता देना भी लाजमी होगा कि यह सभी भूमि दान करता उपरोक्त वर्तमान में राजा विजय प्रताप सिंह जूदेव के खास परिजन और शाख में चाचा हैं। यहां पर कुछ पुराना ऐतिहासिक जानकारी देना भी लाजमी है कि आजादी की जंग का शंखनाद होते ही राजा कुशल पाल सिंह और उनके पुत्र वीर योद्धा राजा निरंजन सिंह जूदेव ने दोआब क्षेत्र में आजादी की लड़ाई की अग्रिम चौकी में बदल दिया था उनके साथ अंग्रेजी फौज के बागी सिपाही अपनी बंदूकों समेत दोआब क्षेत्र में आजादी की जंग का परवान चढ़ाने आ डटे। राजा कुशल पाल सिंह जनता में बहुत ज्यादा लोकप्रिय थे उनके पुत्र वीर योद्धा राजा निरंजन सिंह जूदेव युद्ध कला में बहुत दक्ष थे,उनका अपना कन्हैया घोड़ा, सह योद्धा मंगली मेहतर, जंगली मेहतर प्राणों से अधिक प्रिय थे। आजादी की जंग में दोआब क्षेत्र के बागी सिपाहियों, किसानों तथा जनता के सभी समुदायों के नेतृत्व को स्वीकार किया। निरंजन सिंह की वीरता और सैन्य शक्ति कीर्ति चारों ओर दोआब के उस पार भिंड जिले की कुशवाह घार तक फैल गई थी। ब्रिटिश शासकों ने एक बड़ी फौज को लेकर जूहीका घाट पर बर्बर हमला कर दिया और दोआब इलाके में दाखिल होने की कोशिश की। ब्रिटिश सेना का नेतृत्व इटावा का कलेक्टर एओ ह्यूम कर रहे थे। इस युद्ध में दोआब के रणबांकुरों के साथ-साथ बहुत बड़ी संख्या में कुशवाहा घार के योद्धाओं ने वीर योद्धा चिमना के नेतृत्व में हिस्सा लिया दोनों पक्षों के सैनिक बड़ी संख्या में हताहत हुए अंग्रेज दोआब इलाके में दाखिल नहीं हो सके। चकरनगर स्टेट के राजा निरंजन सिंह के पुत्र राजा विजय प्रताप सिंह जूदेव इंडियन आर्मी 24 राजपूत बटालियन में रिटायरमेंट के बाद वर्तमान में जयपुर में रहते हैं उनकी नाराजगी इस बात को लेकर है कि आजादी के दौर में हमारे पूर्वजों को सरकार की तरफ से दो फूल तक अर्पित नहीं किए गए। आजादी के दौरान सब कुछ कुर्बानी देने वाला परिवार के वंशज आज शासन-प्रशासन से उपेक्षित हैं। राजगढ़ी पर हुए कुलदेवी स्थापना हेतु भूमि पूजन के समय उपस्थित मुख्य अतिथि राजा अजय प्रताप सिंह चौहान रिजौर, परितोष सिंह तोमर दशहरी भदावर, राजा हरि सिंह लहार, राजा उदयन्त प्रताप सिंह सेंगर आयाना ,राजा संजय सिंह सेंगर राजा मंगलेश्वर सिंह बुहारा भिंड, युवराज यशदीप सिंह मैनपुरी, राजा जनार्दन सिंह रसूलाबाद, राजा हर्षवर्धन सिंह नुनारी कानपुर देहात,महेंद्र सिंह तंवर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, सर्वेश सिंह चौहान प्रदेश महामंत्री, रविंद्र सिंह तोमर विधायक दिमनी, संतोष सिंह चौहान जिला अध्यक्ष व्यापार प्रतिनिधि मंडल इटावा। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सरनाम सिंह चौहान ने की और कार्यक्रम का संचालन महाबल सिंह चौहान (गुरुजी) व शिवकुमार सिंह चौहान (मैनेजर साहब) ने किया कार्यक्रम के दौरान स्थानीय पत्रकारों को भी सम्मान सहित बुलाकर सम्मानित किया गया और उपस्थित समुदाय को आशापुरा वाली मां भंडारे का प्रसाद भी भोज के रूप में दिया गया।

क्षेत्रीय जनता ने क्या किया राजा के प्रति याद में

जनता जनार्दन गोकुल सिंह जूदेव व पूज्य बालाभ्यासी जीने राजा निरंजन सिंह जूदेव की याद में एक विद्यालय अथक प्रयासों से स्थापित कराया जिसका नाम रखा गया राजा निरंजन सिंह इंटर कॉलेज निरंजन नगर इटावा। इसके अलावा औरैया जनपद मैं भी वहां की जनता जनार्दन ने राजा की याद को तरोताजा रखने के लिए राजा निरंजन सिंह जूदेव गवर्नमेंट इंटर कॉलेज अयाना औरैया, जो 1989 में स्थापित किया था।

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