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रावण के धराशाई होते ही जमा भीड़ व उपस्थित रामलीला कमेटी एवं अन्य लोग भगवान श्री राम की जय -जय कार करने लगे

 

कायमगंज , फर्रुखाबाद,आरोही टुडे संवाददाता

 

त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम द्वारा अन्याय -अहंकार -दुराचार जैसी बुराइयों का प्रतिरूप बने लंकाधिपति रावण का वध करके इन अत्याचारों को समाप्त कर दिया था। उसी समय से सदाचार की स्थापना का सपना लेकर भारतवर्ष में प्रतिवर्ष रामलीला का मंचन लगभग हर नगर, कस्बा यहां तक की बड़ी आबादी वाले ग्रामों में भी किया जाता है। इसका मतलब साफ है कि रामलीला में दिखाए गए दृश्य मानव जीवन को हमेशा बुराइयों से दूर रहने की प्रेरणा देने के लिए ही दिखाए जाते हैं । इसका उद्देश्य भी मानवता विरोधी हर कृत्य से दूर रहने का ही है । अब यह बात अलग है की स्वार्थ में लिप्त व्यक्ति इस मार्ग पर चलकर राम के चरित्र से कितना प्रभावित होता है, अथवा अपने स्वार्थ के आगे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम द्वारा दिए मार्गदर्शन से कुछ सीख ले कर अपने जीवन में आत्मसात करता है या नहीं। यह तो हर व्यक्ति के ऊपर खुद की आत्मा की आवाज पर निर्भर करता है। वैसे प्रतिवर्ष रामलीला का मंचन समाज को सही दिशा की ओर ही प्रेरित करने के लिए किया जाता है।
इस बार भी कायमगंज नगर में रामलीला कमेटी द्वारा व्यवस्था करके रामलीला का प्रारंभ कराया गया । रामलीला मंचन करने वाले कलाकारों ने राम जन्म से लेकर राम सीताविवाह ,परशुराम संवाद तथा केकई का कोप भवन में जाना और उसके बाद हृदयस्पर्शी भावों से युक्त भगवान श्री राम का वन गमन, सीता हरण और अंत में असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक स्वरूप रावण वध के साथ में रामलीला ग्राउंड पर बनाए गए रावण व उसके परिवार के विशालकाय पुतलों का दहन करके लगभग रामलीला मंचन को समाप्त की ओर ले आए ।अब आगे मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का लंका विजय के उपरांत अपनी पावन नगरी अयोध्या में वापसी के साथ ही अपने प्रिय अनुज भरत का मिलाप कल 6 अक्टूबर को सदैव की भांति परंपरागत ढंग से मनोहारी तथा भाइयों के आपसी वास्तविक स्नेह को दर्शाते हुए मंचन के साथ प्रदर्शित किया जाएगा।
आज विजयादशमी पर्व के शुभ अवसर पर कायमगंज में नवीन मंडी परिसर में रामलीला का मंचन किया गया । जिसमें राम रावण युद्ध की लीला दिखाई गई । कुछ देर युद्ध होने के उपरांत राम के तीक्ष्ण बाण से रावण धराशाई हुआ । उसके तुरंत बाद निर्धारित समय पर रावण उसके अनुज कुंभकरण तथा बेटे मेघनाथ के बनाए गए पुतलों को मंत्रोच्चारण के साथ अग्नि को समर्पित कर दिया गया। जैसे ही पुतलों में आग लगी ,वैसे ही पुतलों में से विशेष प्रकार की ध्वनि निकलने लगी। यह ध्वनि पुतलों में लगाए गए पटाखों तथा आतिशबाजी की ध्वनि बाली सामग्री से निकल रही थी। रावण के धराशाई होते ही बहुत बड़े परिसर में जमा भीड़ तथा मंच पर उपस्थित रामलीला कमेटी एवं अन्य लोग भगवान श्री राम की जय -जय कार करने लगे। रावण के जलते हुए पुतलों के धराशाई होने पर कुछ लोग अपने विश्वास के आधार पर उसकी जलती हुई कोई न कोई चीज घर ले जाने के लिए लेते हुए देखे गए। इसी के साथ सत्य की असत्य पर विजय, सदाचार की दुराचार पर विजय का संदेश देने वाले रामलीला मंचन का आज विधिवत समापन हो गया । इस अवसर पर भारी संख्या में नगर तथा सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से आए पुरुष ,महिलाएं, बच्चे, युवा एवं रामलीला कमेटी के पदाधिकारी तथा सदस्यगण मौजूद रहे।

संवाददाता अभिषेक गुप्ता की रिपोर्ट

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