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डॉ राममनोहर लोहिया चिकित्सालय में प्रत्येक गुरूवार होता है हाइड्रोसील का निशुल्क आपरेशन


फाइलेरिया की दवा खाएं, फेंके नहीं-डीएमओ
फर्रुखाबाद ,आरोही टुडे न्यूज़
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर शुक्रवार को एक होटल में ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को रुग्णता प्रबंधन पर आयोजन हुआ। इसमें विश्व स्वास्थ्य संगठन से एसएमओ डॉ नित्यानंद ठाकुर और पाथ संस्था से रीजनल एनटीडी ऑफिसर डॉ शिवकांत ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को अपने घर पर ही वाशिंग और ड्राइंग करने का तरीका सिखाया। इस मौके पर मौजूद पांच रोगियों को बाल्टी, मग, साबुन, तौलिया और क्रैप बैंडेज वितरित किया गया। साथ ही उन्हें नियमित व्यायाम करने की सलाह दी गई।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और वेक्टर बोर्न डिजीज के नोडल अधिकारी डॉ यूसी वर्मा ने कहा कि फाइलेरिया रोग में अक्सर हाथ या पैर में बहुत ही ज्यादा सूजन हो जाती है। इसलिए इस रोग को हाथी पांव भी कहते हैं। जिनके शरीर में माइक्रो फाइलेरिया के कीटाणु मौजूद हैं उन्हें दवा सेवन करने पर कुछ प्रभाव जैसे जी मचलाना, उल्टी आना, हल्का बुखार आना, चक्कर आना आदि हो सकता है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ राजेश माथुर ने कहा कि जब भी फाइलेरिया टीम घर आये तो उससे दवा खानी है। यह बीमारी एक बार हो जाने पर इसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि इस किट का वितरण सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों से भी किया जाएगा। जिसको इस रोग की शिकायत हो वह सम्बंधित सीएचसी पर जाकर इस किट को ले सकता है। किट लेने के लिए आधार कार्ड अवश्य दिखाएं। उन्होंने बताया कि जिले में अभी 1243 लोग फाइलेरिया रोगी हैं। मरीज को नियमित अपनी साफ़ सफाई करनी चाहिए और अगर पैरों में सूजन है, तो पैरों के नीचे तकिया लगा कर रखें। पैरों को अधिक देर तक लटकाएं नहीं। हाइड्रोसील से ग्रसित मरीज भी फाइलेरिया के अंतर्गत आते हैं वह अपना आपरेशन डॉ राममनोहर लोहिया चिकित्सालय में गुरुवार को मुफ्त करा सकते हैं।

यह बीमारी क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलती है। इस मच्छर के पनपने में मल, नालियों और गड्ढों का गंदा पानी मददगार होता है। इस मच्छर के लार्वा पानी में टेढ़े होकर तैरते हैं। क्यूलेक्स मच्छर जब किसी व्यक्ति को काटता है तो वह फाइलेरिया के छोटे कृमि का लार्वा उसके अंदर पहुंचा देता है। संक्रमण पैदा करने वाले लार्वा के रूप में इनका विकास 10 से 15 दिनों के अंदर होता है। इस अवस्था में मच्छर बीमारी पैदा करने वाला होता है। इस तरह यह चक्र चलता रहता है।

फाइलेरिया के लक्षण-
1. एक या दोनों हाथ व पैरों में (ज़्यादातर पैरों में) सूजन
2. कॅपकॅपी के साथ बुखार आना
3. पुरूषों के अंडकोष में सूजन (हाइड्रोसिल) होना
4. पैरों व हाथों की लसिका वाहिकाएं लाल हो जाती हैं|
गंगा नगर कालोनी की रहने वाली 35 वर्षीय सीमा कहती हैं कि मुझे लगभग चार साल पहले फाइलेरिया की शिकायत हुई थी | काफी निजी चिकित्सकों से इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं मिला | अब मैं सरकारी अस्पताल में जाकर दवा लूंगी l
शीलू टंडन 50 वर्षीय ने बताया कि मुझे लगभग दो माह से दोनों पैरों में सूजन आ गई मैंने निजी चिकित्सकों से ईलाज कराया लेकिन कोई आराम नहीं मिला l अब मैं मलेरिया कार्यालय से दवा लूंगी l
इस दौरान डॉ राममनोहर लोहिया चिकित्सालय से सर्जन वहीदुल हक , मलेरिया निरीक्षक नरजीत कटियार, संगीता,फायलेरिया इंस्पेक्टर योगेश, अनिमेष शुक्ल सभी सीएचसी के आई ओ, बीसीपीएम मौजूद रहे ।

 

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