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श्रीमद्भागवत पुराण कलियुग में मुक्ति का ग्रंथ : अनूप महाराज

जिला हरदोई के ग्राम झौहाना में कलश यात्रा निकालकर श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ किया गया। सबसे पहले कलश पूजन कर गांव के मुख्य मार्ग से होते हुए कलश यात्रा निकाली गई। गर्रा नदी से घट भरकर कलश यात्रा भागवत प्रांगण पहुंची। जहां भागवत कथा का शुभारंभ किया गया।

असलापुर धाम से पधारें सुप्रसिद्ध कथावाचक परम पूज्य अनूप ठाकुर जी महाराज ने प्रवचन देते हुए भागवत कथा के बारे में बताया कि भागवत पुराण को मुक्ति ग्रंथ कहा गया है। इसलिए अपने पितरों की शांति के लिए इसे हर किसी को आयोजित कराना चाहिए। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को हरि स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।
इसी के साथ अनूप महाराज ने भागवत के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए भक्ति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह मनुष्य शरीर बड़ा दुर्लभ हैं, अगर मनुष्य जन्म मिला और भगवान की भक्ति नहीं की तो जीना बेकार हैं।


अनूप ठाकुर ने कहा कि जीवन में दो चीज दुर्लभ कहीं गई है। पहली ‘दुर्लभो मानुषो देहो’ ये मनुष्य शरीर दुर्लभ है। दूसरी “तत्रापि दुर्लभम् मन्ये बैकुण्ठ प्रिय दर्शनम्।” अनन्त-अनन्त योनियों में घूम करके, कीट पतंग आदि बनकर अधोयोनियों में जाकर अनन्त व अवस्थाओं में से हो करके ये तो किसी पुण्य कर्म से ठाकुरजी ने रीझ करके मनुष्य शरीर रूपी एक साधन हम लोगों को दिया है, इसका जितना हम प्रभु भक्ति में उपयोग कर लेवे उतना कम है। इसी के साथ गोकर्ण धुंधकारी परिक्षित जन्म की कथा सुनाई गई! कथा श्रवणार्थ शिवम सिंह, श्याम सिंह, रघुवीर सिंह, मुन्ना सिंह भदौरिया, मोहित सिंह, रामकुमार सक्सेना, लवकुश, ईश्ताक अली समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहें!

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