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मकर संक्रांति आनंद, खुशी और लोगों के साथ मेलजोल का त्यौहार हैं : राजेश खुराना

मकर संक्रांति का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देना : डॉ उमेश शर्मा

संजय सागर की रिपोर्ट

आगरा। मकर संक्रांति हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। यह हर वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाता है।पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तब हिंदू मकर संक्रांति मनाते हैं। इस दिन लोग स्नान आदि करके दान पूर्णिय भी करते हैं। इस त्यौहार को देशभर में अलग-अलग नामों से अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है।

इस संदर्भ में आगरा स्मार्ट सिटी,भारत सरकार के सलाहकार सदस्य एवं हिन्दू जागरण मंच, ब्रज प्रान्त उ.प्र. के प्रदेश संयोजक, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया व्यापार मंडल के जिला उपाध्यक्ष व आत्मनिर्भर एक प्रयास के चेयरमैन सुप्रशिद्ध समाज सेवक राजेश खुराना ने सभी को सपरिवार लोहड़ी, मकर संक्रांति, पोंगल, भोगली बिहू, उत्तरायण और पौष पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि इस दिन लोग तिल का लड्डू बनाकर खाते हैं। मकर संक्रांति के तीन लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। इस दिन पतंगबाजी भी की जाती है। मकर संक्रांति प्रसन्नता और एकजुटता का त्‍यौहार है। इस त्यौहार को देशभर में अलग-अलग नामों से अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाया जाता है। दक्षिण भारत में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। इस दिन लोग गंगा स्नान भी करते हैं। मकर संक्रांति आनंद खुशी और लोगों के साथ मेलजोल का त्यौहार है। मकर संक्रांति का मुख्य उद्देश्य लोगों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देना है। मकर संक्रांति प्रसन्नता और एकजुटता का त्यौहार है। मकर संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसे देश भर में अलग-अलग नामों से और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। लोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के साथ जैसे- नित्य, गाना और भोजन के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। जिसमें विशेष रूप से तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। लोग पतंग भी उड़ाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। इस पतंगों और तिल के लड्डुओं के अनोखे हिंदू समुदाय द्वारा बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग इस त्यौहार को सुबह के समय नदियों में पवित्र डुबकी लगाकर मनाते हैं, और सूर्य देव की पूजा करते हैं। पूरे देश मकर संक्रांति त्योहार अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब और हरियाणा में माघि, बंगाल में पौष संक्रांति आदि में मनाया जाता है। हर क्षेत्र अपने अपने रीति-रिवाजों के साथ अपना त्यौहार मनाते हैं। लेकिन त्यौहार का उद्देश्य उत्साह, समृद्धि, खुशी का प्रसार करना है। भारत एक ऐसा देश है जिसे त्‍यौहारों की भूमिका मानी जाती है, और मकर संक्रांति से ये त्‍यौहार शुरू होते हैं। यह हिंदू धर्म के त्‍यौहारों में से एक हैं, जो सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन चावल, गेहूं, मिठाई दान, करने से व्यक्ति को समृद्धि आता है, और उसकी हर प्रकार की बाधाएं दूर होती है। यहां हर साल आमतौर पर 14 जनवरी को पड़ता है लेकिन सूर्य चक्र के अनुसार यह 15 जनवरी को भी मनाया जाता है। भारतीय महीनों में यह त्यौहार पौष महीने में आता है। साल 2022 में मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को मनाया जाएगा यानि यह शीत ऋतु के दौरान प्रतिवर्ष मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है तब हिंदू मकर संक्रांति मनाते हैं।

इस शुभ अवसर पर लोहड़ी, मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति लखनऊ के चेयरमैन डॉ उमेश शर्मा ने कहा कि माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव अपने बेटे शनि से मिलने के लिए उनके घर पर जाते हैं। क्योंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस त्यौहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसके त्योहार के नाम में ‘मकर’ शब्द का अर्थ मकर राशि है तथा ‘संक्रांति’ शब्द का अर्थ संक्रमण है इसीलिए मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में संक्रमण। जिसे हिंदू धर्म के अनुसार शुभ अवसरों में से एक माना जाता है और बहुत ही खुशियों के साथ यह त्‍यौहार लोगों द्वारा मनाया जाता है। ग्रह मकर का उत्तरायण में सूर्य का संक्रमण आध्यात्मिक महत्व का है और इस दिन यह माना जाता है कि गंगा जैसे पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से हमारे सारे पाप धुल जाते हैं, और हमारी आत्मा पवित्र और शुद्ध हो जाती है। मकर संक्रांति में रात छोटी और दिन लंबे होने लगती हैं, जो आध्यात्मिक प्रकाश की वृद्धि और भौतिकतावादी अंधकार को कम करने का प्रतीक है। यह भी माना जाता है कि मकर संक्रांति के दौरान “कुंभ मेला” पर प्रयागराज में त्रिवेणी संगम, पर पवित्र स्नान करने से हमारे सभी पाप धुल जाते हैं, और जीवन के सभी बाधाएं दूर होती हैं। मकर संक्रांति प्रसन्नता और एकजुटता का त्यौहार है। मकर संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसे देश भर में अलग-अलग नामों से और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। लोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के साथ जैसे- नित्य, गाना और भोजन के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। जिसमें विशेष रूप से तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। लोग पतंग भी उड़ाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। इस पतंगों और तिल के लड्डुओं के अनोखे हिंदू समुदाय द्वारा बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। लोग इस त्यौहार को सुबह के समय नदियों में पवित्र डुबकी लगाकर मनाते हैं, और सूर्य देव की पूजा करते हैं। पूरे देश मकर संक्रांति त्योहार अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब और हरियाणा में माघि, बंगाल में पौष संक्रांति आदि में मनाया जाता है। हर क्षेत्र अपने अपने रीति-रिवाजों के साथ अपना त्यौहार मनाते हैं। लेकिन त्यौहार का उद्देश्य उत्साह, समृद्धि, खुशी का प्रसार करना है।

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