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त्यौहार का उद्देश्य उत्साह, समृद्धि, एकता व खुशी का प्रसार करना- प्रदेश सह संयोजक अभिषेक त्रिवेदी

अभिषेक त्रिवेदी, प्रदेश सह संयोजक, दिव्यांग प्रकोष्ठ, भाजपा, उत्तर प्रदेश ने कहा कि माना जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य देव अपने बेटे शनि से मिलने के लिए उनके घर पर जाते हैं। क्योंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस त्यौहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसके त्योहार के नाम में ‘मकर’ शब्द का अर्थ मकर राशि है तथा ‘संक्रांति’ शब्द का अर्थ संक्रमण है इसीलिए मकर संक्रांति का अर्थ है सूर्य का मकर राशि में संक्रमण। जिसे हिंदू धर्म के अनुसार शुभ अवसरों में से एक माना जाता है और बहुत ही खुशियों के साथ यह त्‍यौहार लोगों द्वारा मनाया जाता है। ग्रह मकर का उत्तरायण में सूर्य का संक्रमण आध्यात्मिक महत्व का है और इस दिन यह माना जाता है कि गंगा जैसे पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से हमारे सारे पाप धुल जाते हैं, और हमारी आत्मा पवित्र और शुद्ध हो जाती है। मकर संक्रांति में रात छोटी और दिन लंबे होने लगती हैं, जो आध्यात्मिक प्रकाश की वृद्धि और भौतिकतावादी अंधकार को कम करने का प्रतीक है।

अभिषेक त्रिवेदी प्रदेश सह संयोजक दिव्यांग प्रकोष्ठ ने यह भी कहा कि यह भी माना जाता है कि मकर संक्रांति के दौरान प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान करने से हमारे सभी पाप धुल जाते हैं, और जीवन के सभी बाधाएं दूर होती हैं। यह एक ऐसा त्यौहार है जिसे देश भर में अलग-अलग नामों से और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। लोग विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के साथ जैसे- नित्य, गाना और भोजन के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। जिसमें विशेष रूप से तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। लोग पतंग भी उड़ाते हैं और अपने परिवार और दोस्तों के साथ मौसम का आनंद लेते हैं। इस पतंगों और तिल के लड्डुओं के अनोखे हिंदू समुदाय द्वारा बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है।

लोग इस त्यौहार को सुबह के समय नदियों में पवित्र डुबकी लगाकर मनाते हैं, और सूर्य देव की पूजा करते हैं। पूरे देश मकर संक्रांति त्योहार अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है। तमिलनाडु में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब और हरियाणा में माघि, बंगाल में पौष संक्रांति आदि में मनाया जाता है। हर क्षेत्र अपने अपने रीति-रिवाजों के साथ अपना त्यौहार मनाते हैं। लेकिन त्यौहार का उद्देश्य उत्साह, समृद्धि, खुशी का प्रसार करना है।

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